ज़िंदगी की सरजमीं पर...
About the Author

About the Author

इक मदहोशी से भरी रात,

मनुशरद की पड़ी बुनियाद,

कुछ तीस पैंतीस साल पहले,

ज़रा ही वक़्त गुज़रा है जामा पहनाने में,

जी जुड़ा रहा है लिखने लिखाने में,

यही कह सकता हूं “मनुशरद” के बारे में…