मनु शरद

ज़िंदगी की सरजमीं पर...

मनु शरद

धड़कनों में ज़िंदा!!!

अच्छा ख़ासे परेशान हैं तबसे,जानने लगे हैं ख़ुद को जबसे, ख़ूब भाती हैं वो बातें हमको,जिनमें हमें छोड़ दूसरे हों फंसे, तबियत ख़राब हो गई …

गोमती के पानी का असर!!!

बात बात पर,कभी कभी हर बात पर,आंख भर आती है,ये परेशानी का सबब है?या मेरी नादानी गज़ब है… सारी सारी रात,कभी कभी दिन के बाद …

नज़रों का इल्म!!!

कभी कभी अपने पर यकीं करने में,जाने क्यों किसी का दख़ल चाहते हैं, मेहनत से बनाई हुई इस ज़िंदगी में,किसी की तौसीक़ क्योंकर चाहते हैं, …

दीवार पे चींटी!!!

दीवार पे चींटी देख कहते हैं,हमारे घर है हाथी आया! दाना ले जाती चींटी से बोले,हाथी जैसा क्योंकर खाया! लगी सोचने कुछ कहा नहीं,वो अपनी …

पलक झपकते ही!!!

गुज़र रहे थे उस गली,जो थी वीरान पड़ी,सामने थी वो खड़ी,अकस्मात् देख उसे,हमने पूछा कौन हो,वो बोली…ज़िंदगी!हमने कहा किसकी?वो बोली…तुम्हारी… हाथ पैर कांपने लगे,सिहरन सी …