ज़िंदगी की सरजमीं पर...
व्यंग्य

दर्जन भर दर्द!!!

दर्जनों में दर्द,सैकड़ों में ख़ुशी,जो कुछ बची,ज़िंदगी ही होगी… आसमाँ बिछा कर,चादरें समेट लीं,पैर पसारने की,जगह नहीँ छोड़ी… पी गये हैं दरिया,समंदर है बाक़ी,छोटे से …

सभ्यता है भी पुरानी???

यहां आदम के मिले हैं अंडे,यहां आदम अंडे से  निकले,यहां के बहुत बड़े बड़े फंडे,ना छुट्टी ही मनाई ना  संडे, ये सिलसिले चले सदियों तक,फिर …

पान का पत्ता!!!

पान का पत्ता,लगा के कत्था,चूना लगा रहा,होंठ कर लाल,कटी है ज़ुबान,मज़ा आ रहा… ज़्यादे हो चूना,कत्था लगाना,क़िमाम महका,ज़ायका चटका,कटी ज़ुबान की,कैंची है चला रहा… पान …