काठ चिरैय्या!!!
काठ चिरैय्या इक बना,बढ़ई ने दो पंख दिए लगा,कान में उसके जा फूंका,उड़ जा दूर कहीं उड़ जा,वो जा बैठी देख दरख़्त बड़ा… ऊपर से …
काठ चिरैय्या इक बना,बढ़ई ने दो पंख दिए लगा,कान में उसके जा फूंका,उड़ जा दूर कहीं उड़ जा,वो जा बैठी देख दरख़्त बड़ा… ऊपर से …
दर्जनों में दर्द,सैकड़ों में ख़ुशी,जो कुछ बची,ज़िंदगी ही होगी… आसमाँ बिछा कर,चादरें समेट लीं,पैर पसारने की,जगह नहीँ छोड़ी… पी गये हैं दरिया,समंदर है बाक़ी,छोटे से …
ख़बर है ये, कि ये ख़बर है ख़ास,वक़्त हो बुरा, क्या कीजिये जनाब,कैसे चले पता कि वक़्त है ख़राब,वक़्त के तो होते नहीं कोई जज़्बात, …
यहां आदम के मिले हैं अंडे,यहां आदम अंडे से निकले,यहां के बहुत बड़े बड़े फंडे,ना छुट्टी ही मनाई ना संडे, ये सिलसिले चले सदियों तक,फिर …
ये डेटा जिसने देखा वो ग्रेट हो गया,ये डेटा जो दिखा दे वो सच हो गया, बिन डेटा के बेटा अजी कुछ ना हुआ,जब हो …
पान का पत्ता,लगा के कत्था,चूना लगा रहा,होंठ कर लाल,कटी है ज़ुबान,मज़ा आ रहा… ज़्यादे हो चूना,कत्था लगाना,क़िमाम महका,ज़ायका चटका,कटी ज़ुबान की,कैंची है चला रहा… पान …
रेत के टीलों का पहाड़ बना डाला,लगा जो धसने, बवाल मचा डाला, पत्थर को तौलते हो रेत से मगर,घिस घिस उसे रेतीला बना डाला, घर …
उसने हमें ज्यूँ देखा,पासा हमपे यूँ फेंका,साड़ी, जो पहने रेखा,नायाब सा ये तोहफ़ा,आप पे है फब रहा,आप लग रहीं है रेखा… ज़री, ये रेशम के …
दो बछड़े,इक आदम का,इक गाय का, बोलो क्या खायेगा? इक खायेगा,दूध मलाई भर भर,दूजे ने खाया,चारा भूसा चर चर, बोलो कहां जायेगा? इक जायेगा,शहर पहाड़ …
रोज़ अख़बार पढ़ कर सोचता हूं,आख़िर क्यों मैं अख़बार पढ़ता हूं, बचपन से वही ख़बर पढ़ता रहा हूं,सोचता हूं कि मैं क्या पढ़ रहा हूं …