ग़ुलाम आज़ादी के परे!!!
कैनवास पे रंगों के छींटे यूं हैं उड़ेले,के ज़िंदगी ने कहा चलो इनमें रंग भरें, आबशारों को देख रहे उल्टे पड़े हुए,लगे के जैसे आसमां …
कैनवास पे रंगों के छींटे यूं हैं उड़ेले,के ज़िंदगी ने कहा चलो इनमें रंग भरें, आबशारों को देख रहे उल्टे पड़े हुए,लगे के जैसे आसमां …
लगातार सिलसिलेवार कहानी,सिलवटें लगी शानदार कहानी,बुर्राख़ क़मीज़ जानदार कहानी,लगता ये है ईमानदार कहानी, गरेबां झांकती पहरेदार कहानी,करिश्मे दिखाती उम्रदार कहानी,हर रोज़ मांजती चमकदार कहानी,देखो है …
जल को पता ही ना चला,जाने कब बर्फ़ बन ढल गया, शायद ग़फ़लत में रहा होगा,जब जम गया तब थम गया, मारने चाहे हाथ पैर, …
ना बरसे फाल्गुन फुहार,बिखरे ना हीं रंग बौछार,ना गाये होरी मेघ मल्हार,बिनती करे हैं कन्हैया से,तुम्हरी राधा तुम्हरा इंतजार,औ मन ही मन बैठी हैं ठान… …
बोलने से पहले, तीखा चखा कीजिये,चिकनाई हटेगी ज़ुबां से, मज़ा लीजिये, अनर्गल कभी कभी बड़बड़ा लीजिये,ज़हन पे ज़ोर मगर, आने ना दीजिये, ख़ुद को परेशाँ …
ख़ुद पे ना गुज़रे, मुश्क़िल है समझ पाना,हैं हज़ारों जिन्हें मयस्सर नहीं इक दो दाना, नहीं हासिल, जिसे अच्छा कहे ज़माना,है मुफ़लिसी वो दाग़, मुश्क़िल …
बचपन में आ गये, धूप सेंकने का मज़ा, किसी बात की नहीं फ़िक्र, ना कोई ज्ञान ठेलती बातें ना ही कल का कोई ज़िक्र…ये हम …
धड़कनें बेचैन और मैं हूं ख़ामोश खड़ा,बेवजह की उलझनों को हूं सुलझा रहा, हैं क्या कुछ ऐसा के जिससे हूं डरा डरा,भूचाल है मेरे अंदर, …
ये बात मानता नहीं मेरा मन है,के बेइंतेहा गहरा अकेलापन है, शाख़ें जिस्म की लगी हैं सूखने,यूं दूर अभी पतझड़ का मौसम है, नींद को …
अग़रचे ये बात होती,दिन में ग़र रात होती,तो रात कभी ना सोती,जो रात कभी ना सोती,वो रात रात ना होती,जब रात रात ना होती,बातों की …