मनु शरद

ज़िंदगी की सरजमीं पर...

मनु शरद

ये साये हैं!!!

ये साये हैं परछाइयों के,ये पाये(पैर) हैं गहराइयों के,बड़ी देर से ढूढ़ें उचाईयों को,यहां साये कतराते हैं रुसवाइयों से … ये साये हैं….. ये रास्ते …

कचोट!!!

किसी चेहरे पे क़शिश ऐसी पाई,ज़हन में उतरी, ज़िंदगी मिल गयी, जिनसे मिले, परछाईं दिखे उनकी,मिले उनसे तो दुनिया खिल गयी, आग़ोश में दम टूटता …

मायूस कुन बातें!!!

ज़िंदगी ज़रा देर जो बैठी सुस्ताने,लगी उठने तो पैर लगे कँपकपाने, उसने भरोसा दिलाया इत्मिनान से,कराहना छोड़ कर लगी मुस्कुराने, यक़ीं पर गर्द जल्द बैठ …

सिफ़र!!!

माथे पर, सिफ़र ठहरा,चांदबाली सा लहरा रहा,बढ़कर रुख़सार चूमता,हो सुर्ख़, कभी दमकता, सिफ़र से सफ़र शुरू हुआ,सिफ़र से बने है कहकशां,सिफ़र से कम, चश्म जमा,ऊपर …

प्याज!!!

जिंदगी ब्याज पे और प्याज पे चलती है,छौंके साथ में लौकी आलू मेथी बनती है, आलू रोजमर्रा की दिनचर्या की सब्जी है,बाकी सब्जियां उसी में …

हे जगन्नाथ!!!

जग चेतन तुम,मन चिंतन तुम,कण कण तुम,हर क्षण तुम, शून्य में तुम,मौन में तुम,असंख्य तुम,अखण्ड तुम, शंखनाद तुम,अंतर मन कीआवाज़ तुम,आग़ाज़ तुम, पार्थ तुम,निस्वार्थ तुम,सुदर्शन …

ज़ायक़ा क़लियां!!!

सैलाब गुज़र रहे ज़ायका क़लियों से,बुलबुले फूट रहे, फ़रमाने को चंद चीज़ें, फ़िरनी, गुलाब जामुन या हो रसगुल्ले,ज़ायक़ा क़लियों की ऐठन हैं मिटा देते, अबकी …

ज़िंदगी का बंदर!!!

ज़िंदगी का बंदर,दिखता है बाहर,रहे चित्त अंदर,हाय रे ये बंदर…मन को खींचकर,आंख को भींचकर,चाहता नहीं देखना,वीभत्स होती नज़र,लगा बुलाने चीख़कर,अपने अंदर का बंदर,वो खींसे निपोड़ …