ज़िंदगी की सरजमीं पर...
कन्हैया!

हे जगन्नाथ!!!

जग चेतन तुम,मन चिंतन तुम,कण कण तुम,हर क्षण तुम, शून्य में तुम,मौन में तुम,असंख्य तुम,अखण्ड तुम, शंखनाद तुम,अंतर मन कीआवाज़ तुम,आग़ाज़ तुम, पार्थ तुम,निस्वार्थ तुम,सुदर्शन …

जन्माष्टमी!!!

जमुना में उफ़न रही थी बाढ़,घबराये थे वासुदेव महाराज,कंस के डर का नहीं इलाज,डरा मानुस होत घातक बेहाल,देवकीनन्दन का सोच के हाल,कंडिया में लिटाई के …