जिस दम आज़ाद ख़याल बयां हुआ,
मैं परेशानी का सबब, मेरी जाँ हुआ,
अच्छा था जब, ढका छुपा था सब,
राज़ नाज़िर हुआ, मैं बदनाम हुआ,
ख़ता कोई कर नहीं सके चाह के भी,
जाने क्यों दिल बार बार पशेमां हुआ,
ख़ुदा ना करे के, ज़ाहिर करना पड़े,
इश्क़ है तुमसे, दिल जाँनिसार हुआ,
तुमको मिलना चाहिए ‘तुम’ से जल्दी,
शायद जान सको क्यों मैं परेशां हुआ,
थोड़ा बह जाने दो वक़्त का दरिया,
समझ आयेगा क्या कुछ दरमियाँ हुआ,
मैख़ाने में ज़िंदगी खिलती है ज़रूर,
सुरूर चढ़ के उतर गया, बेईमान हुआ,
मुहब्बत समझी नहीं महसूस की जबसे,
तब जाके जाना, जीना इक अरमान हुआ,
शौक़ ने क्या कुछ ना करवाया हमसे,
मनुशरद के लिए दुनिया कारवां हुआ,
“मनुशरद”
Copyright © by Manish Kumar Srivastava
Wahh ,, wahh..