ज़िंदगी की सरजमीं पर...
दशहरा!!!
दशहरा!!!

दशहरा!!!

तस्वीर राम की सुंदर लग रही है,
तासीर राम की असर कर रही है,
रावण को तजना ज़िंदगी नहीं है,
मन रावण को समझने की,
ज़रूरत हमेशा से रही है…

दश हरा इंगित ये कर रहा है,
वो दस आदतें जो हैं पीछे पड़ी,
उनसे पीछा छुड़ाने की और भी,
मनुशरद को ज़रूरत आन पड़ी है,
ये मानने की आवश्यकता बड़ी है…

“मनुशरद”

Copyright © by Manish Kumar Srivastava

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