पहाड़ों के प्रति मेरा लगाव वहां जल्द पहुंचने की व्याकुलता,
और मेरे अनगिनत तजुर्बों में बसा कुमाऊं, गढ़वाल… शायद यहीं से नींव पड़ी “नंदिनी” के बारे में कहने की…
“नंदिनी” वो ख़्वाब है जो हर इक का सच होना चाहता है…
इक छोटे पहाड़ी क़स्बे से शुरू हुई इक मासूम मगर निर्भीक और बेहद स्वतंत्र सोच रखने वाली लड़की की आपबीती है,
जिसका नाम नंदिनी है…
मुझे यक़ीन है के नंदिनी से मिलकर आपको लगेगा कि आप उससे कहीं मिल चुके हैं या क़ाश आप उससे मिल सकें,
ग़र हुआ ऐसा तो ये नंदिनी के जीवन की सार्थकता होगी…
जो ख़ुशी मुझे “नंदिनी” लिखने में हुई, आज मैं आपसे वो साझा करने जा रहा हूं और आपको “नंदिनी” के साथ चलते चलते अपना सा लगने लगे तो मैं ख़ुद को कृतार्थ समझूंगा!!!
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“मनुशरद”
Copyright © by Manish Kumar Srivastava