ज़िंदगी की सरजमीं पर...
नया साल!!!
नया साल!!!

नया साल!!!


आमद हुई नया साल आया,
स्वागत है नया साल आया,
पुराना क्या है जो नया आया,
नया क्या जो पहले ना पाया…

जो गुज़र गया, वो अब गया,
जो गुज़रेगा, वो होगा नया,
ये तिलिस्म है तिलिस्मी भाषा,
समझा, कोई समझ ना पाया…

जो पनपा है, वो होगा नया,
वो पनपेगा, जो सूख गया,
जो आंधी में था बह गया,
वो कहीं जा कर उग गया…

कल का आज, कल हुआ,
आज, कल का फल हुआ,
ये समय का दल दल बड़ा,
ये समय है जो कि उड़ चला…

ये आश्चर्य ही है साल नया,
चकित होने का साल नया,
ये सुंदर धरती ये वसुंधरा,
ये दृश्य मनोरम हरा भरा…

नई कोपलों सा खुल गया,
नये आश्चर्यों ने जन्म लिया,
जब जिन खोजा तिन पाया,
मुबारक़ हो, नया साल आया…

“मनुशरद”

Copyright © by Manish Kumar Srivastava

One comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *