बावले से दिन, बावली सी रात है
हम साथ साथ, गज़ब की बात है ,
उम्र बराबर, साल गुज़ारे हैं हमने,
फिर भी लगे यूं, कल की बात है,
कितनी दफ़े हुए ख़फ़ा इकदूजे से,
हरबार लगा आख़िरी मुलाक़ात है,
अभी तो गुज़री इक उम्र साथ में,
उसपार की अभी होनी शुरुआत है,
फ़ासले कम रहे कभी रहे ज़्यादा,
दूरी कम करने में मगर क़ामयाब है,
क्या कहूं बारे में तेरे, सब याद है,
तेरे ख़यालों में गुंधे मेरे ख़यालात है,
उम्र के दरीचों में धागे बांध कर,
यूं दुआ का सिलसिला बरक़रार है,
उसके दर पर सर झुका बार बार,
उसका करम है के सब लाजवाब है,
फाल्गुन महीना रंगों की बौछार है,
टेसूं के फूलों सा खिला आफ़ताब है,
“मनुशरद”
Copyright © by Manish Kumar Srivastava
Lovely verses on naivety
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