कभी यूँभी हुआ है मुहब्बत के थाने में,
उन्हीं के हो गये हम उनको रंग लगाने में,
गुजिया और मिठाई की बातें बनाने में,
साँवली सूरत पर हैं मर मिटे ये बताने में,
मुहब्बत रंग लायेगी उनको रंग लगाने में,
होली मनाने आये वो हमारे ग़रीबख़ाने में,
नाज़ुक सा प्यार है रंगों का त्यौहार है,
हर नज़र बौरा रही है उनके इंतेज़ार में,
ग़म जो टिके हुए थे हमारे आशियाने में,
रंग में हो सराबोर, लग गये जश्न मनाने में,
उन बिन दिल नहीँ लगता होली मनाने में,
अबीर लगा गालों पर मन लगा बौराने में,
“मनुशरद”
Copyright © by Manish Kumar Srivastava
Holi Mubarak!! Best lines
“कभी यूँभी हुआ है मुहब्बत के थाने में,
उन्हीं के हो गये हम उनको रंग लगाने में” !