मेरी आहों का ना तज़क़िरा कीजिये,
मिलता है सुकूँ आप मुस्कुरा दीजिये,
रास आने लगी है हमें, शब ए ग़म,
मेरे दर्द की ना कोई दवा कीजिये,
जो हो जाये हुस्न मेहरबां इश्क़ पे,
शोख़ नज़रों से इशारे ज़रा कीजिये,
हम भी हैं शरीक़, दर्द में आपके,
मिले चैन इससे तो बता दीजिये,
जो मिले ना सुकूँ तो क्या कीजिये,
दरवाज़ा बे खटके खटखटा दीजिये,
नम होते पलों में सूखे हुए अश्क़,
ये बेरुख़ी हमसे ना किया कीजिये,
जब कभी याद सताये मेरी आपको,
मेरे गीतों को ज़रा गुनगुना लीजिये,
हो शिकवा जो हमसे कभी आपको,
ग़ैर का क़लाम सुन लिया कीजिये,
ग़र इश्क़ है इक सवाल ज़हन में तेरे,
मेरी नज़रों में ख़ुद को बयां देखिये,
रुख़सती की बातें ना कीजिये हुज़ूर,
आप हैं आस, आस पास रहा कीजिये,
फ़िज़ाओं में रवानी है ख़ासी इधर,
चिंगारियों को खुलकर हवा दीजिये,
सांसों की तपिश से थिरकते हुए लब,
मरमारते लबों पे मुहब्बत सजा दीजिये,
मनुशरद नज़र आते रहेंगे सदा आपको,
खुली आंखों से ख़्वाबों का मज़ा लीजिये,
“मनुशरद”
Copyright © by Manish Kumar Srivastava