ज़िंदगी की सरजमीं पर...
ॐ!!!
ॐ!!!

ॐ!!!

सुकूं मिलता उस जगह,
जहां निःशब्द हो आ बैठा,

अ उद्गम म से उपासना तक,
बीच बोलचाल में उ है बैठा,

अ बाण है म धनुष हो रहा,
उ अक्षर प्रत्यंचा रहा चढ़ा,

सावधानी से बोलिये बोल,
छूट प्रत्यंचा से दिल पे लगा,

मुंह खुला तो अ निकला,
म से बंद और उ बीच बैठा,

ॐ का उच्चारण भला,
ॐ से निर्गुण हो चला,

आकार साकार निराकार,
जहां मिला अवतार बना,

अ उ म से मिल ॐ बना,
स्वर निकला जीवन चला,

उद्गम फिर अंत तक चला,
अंत से अनंत, आरम्भ हुआ,

ॐकार को समझना चाहा,
समझा कि उसका नहीं साया,

“मनुशरद”

Copyright © by Manish Kumar Srivastava

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