ज़िंदगी की सरजमीं पर...
उनका साथ…मन की बात

उनका साथ…मन की बात

Copyright © by Manish Kumar Srivastava

सफ़र में उनका साथ,  हाथों में हाथ,
रंज भी ना हो किसी को, तो कैसे मज़ा लीजिये,

किस बहर में लिखूँ कि तू मिल जाये,
मुझे तो तेरे सिवा और कुछ भी ना चाहिये,

खुदाई माँग ली होती तो शायद मिल भी जाती,
इतना करम तो कीजिये कि हमसे रुख़सती ना लीजिये,

चाँद तारे जो टँगे है फ़लक़ की चादर पे,
नज़र भर देख लीजिये, उनको वजूद दे दीजिये,

मुख़्तसर से पल, पल रहें हैं उनकी पलकों पे,
वक़्त ही थम जाये अग़र पलकें झपका लीजिये,

बमुश्किल तमाम ये अहद है कर लिया,
दर से तुम्हारे जायेंगें बस साथ हो लीजिये,

गुलाब की पँखुड़ी पे शबनम की बूंदें,
इतनी खूबसूरत सबा, कोई आँखें कैसे मूँदे,

रिमझिम बहते अश्क ये कहानी हैं कहते,
उनके आने की आमद ने दरिये हैं खोल दिये,

यूँही टहल रहे थे उनके साथ दुशाला ओढ़े,
इक मसखरा कहता गया, उपर वाला जब भी देता…

बड़े मुक़ाम हासिल कर के ये तय है पाया,
सुकूँ ए सुख़न से बढ़कर कुछ भी ना चाहिये,

“मनु शरद”

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