Copyright © by Manish Kumar Srivastava
काली अंधेरी रात,
घनघोर घनेरी रात,
स्याह बरसती रात,
बहकती बरसात,
सीप ने मुँह खोला,
मादक मन डोला,
सीप ने जीवन चाहा
बूँद ने जीवन उड़ेला,
उहापोह सी रात ,
कहे सुने की बात,
आँखों कटी रात,
अँगड़ाई लेती रात
जल ने जीवन बोया,
सुमंदर के तले में,
जलपत्थरों का साया,
सीप पे यौवन आया,
सदियों का इंतेज़ार,
लाया है नई बहार,
पूर्णमासी की रात,
हो रही पूर्ण आज,
मीठी तड़पी सीप,
लगा रही थी चीख़,
कुदरत का करिश्मा,
सीप ने जीवन जन्मा,
जीवन की ज्योति,
प्यारा सुंदर मोती,
लिये उसको गोद,
प्रफुल्लित आमोद,
सीप का कार्य पूर्ण,
निरंतरता का चक्र,
समय की परिधि में,
आज हुया सम्पूर्ण,
समय घटित चला,
नश्वरता को समझ,
कल आज कल का
कालचक्र चलचला,
“मनु शरद”
बहुत ख़ूब
बहुत सुंदर