ज़िंदगी की सरजमीं पर...
आज़ादी!!!
आज़ादी!!!

आज़ादी!!!

ख़ुश हैं हम, अपने वतन में हैं हम,
आज़ाद हैं हम, आबाद हैं हम,
बस थोड़ा बहुत परेशान हैं हम,
कुछ आदतें हैं जो बदलनी हैं,
कुछ रवायतें हैं जो छलनी हैं,
कुछ का ज़िक्र है यहां पर,
कुछ रह गयीं तो माफ़ कर,
चलो, अब खुलकर बात कर,
बातें हैं गंभीर तनिक ध्यान धर…

आज़ादी चाहिये, कमज़र्फ सी बातों से,
आज़ादी चाहिये, दकियानूसी ख़यालों से,
आज़ादी चाहिये, सर पर चढ़े उबालों से,
आज़ादी चाहिये, बिन बात बने ग़ुबारों से,

आज़ादी चाहिये, गहरी बैठी कुंठाओं से,
आज़ादी चाहिये, निराशा भरी निगाहों से,
आज़ादी चाहिये, कमज़ोर भावनाओं से,
आज़ादी चाहिये, कामचोर आशाओं से,

आज़ादी चाहिये, खाली ख़याली पुलाओं से,
आज़ादी चाहिये, संकीर्ण मानसिकताओं से,
आज़ादी चाहिये, ग़ुलाम विचारधाराओं से,
आज़ादी चाहिये, फ़िज़ूल अवधारणाओं से,

आज़ादी चाहिये, हरदम “ना” कहने वालों से,
आज़ादी चाहिये,  हां में “हां” करने वालों से,

और…

आज़ादी पानी है, गुटखा बनाने वालों से,
आज़ादी पानी है, लाल होती दीवारों से,
आज़ादी पानी है, पान की पिचकारों से,
आज़ादी पानी है, स्वच्छ ना रहने वालों से,

आज़ादी पानी है, घर गंदा करने वालों से,
आज़ादी पानी है, घर गंदा रखने वालों से,
आज़ादी पानी है, दरिया में खुले नालों से,
आज़ादी पानी है, रसायन बहाने वालों से,

आज़ादी पानी है, दहशत गर्द ज़माने से,
आज़ादी पानी है, नाहक़ आग भड़काने से,
आज़ादी पानी है, लावारिस लाश बहाने से,
आज़ादी पानी है, नल में ना पानी आने से,

आज़ादी पानी है, ग़ैर ज़िम्मेदारों से,
आज़ादी पानी है, ताना मारने वालों से,
आज़ादी पानी है, नासूर बनी बीमारियों से,
आज़ादी पानी है, मुफ़लिसी बेचने वालों से…

“मनुशरद”

Copyright © by Manish Kumar Srivastava

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