अवधपुरी से आई रे “गुजरिया”,
इंद्रप्रस्थ से आया रे “सांवरिया”,
मिलन ये कैसा अद्भुत रसिया,
होरी मुबारक़, चखिये गुजिया,
आज अवध की होरी है रसिया,
उड़त गुलाल रंग भरे रसिया,
लड़ गईं अंखियन से अंखियां,
रसिया हमरे, बहुतई रसिया,
रग रग रंग अंग भरे रसिया,
गावत गीत बजावै ढुलकिया,
हर इक थाप पे गावै तबला,
नाचत गावत सब संग रसिया,
अबिर गुलाल हरे रंग अंगिया,
खेलत सब हिल मिल गोरिया,
भंग रस में झूम रही अंखियां,
नैनन से बैनन करे रसिया,
टेसूं तूली सुर्ख भई बगिया,
गेंदा गुलाब चहुं बरसन लगिया,
रास रसावैं गोपियों संग गोपियां,
इससे बढ़कर कुछ नहीं मितवा,
हमरा करेजवा, हमरी गुड़िया,
हमरी दुनिया छोटी सी चिड़िया,
चली रे ठुमकती आपन बगिया,
पुष्पित हर्षित सांवरी सांवरिया,
आज अवध बना रे बिरजवा,
कान्हा के संग धूम रचईवा,
नंद के घर बजी रे बंसुरिया,
आज अवध में होरी हो रसिया…
“मनुशरद”
Copyright © by Manish Kumar Srivastava