वो जो हममें तुममें ख़ास था,
वो क्या बस कोई रिवाज़ था,
ना कोई रिश्ता ना ताल्लुक़ात,
क्या जानिए वो क्यों नाराज़ था,
चाहा था बस अहसास इतना,
ग़र ना भी हो, बताइये साथ था,
ऐसा क्या कुछ था पूछ लिया,
कहने में जिसे, बड़ा ऐतराज़ था,
जो मिल गया वो क़ाफ़ी नहीं,
जो खो गया उसका मलाल था,
जब जी चाहा जी तराश लिया,
ख़ुद को पाने का क्या अंदाज़ था,
रास्ते एक थे बहुत दूर तलक,
क्योंकर रुख़सती का ख़याल था,
वो तो होगा ही, जो होना है बदा,
दूर से दिखता था जो होना हाल था,
“मनुशरद”
Copyright © by Manish Kumar Srivastava
बहुत खूब