हृदय की रिक्तता का क्या कहिये,
आपके होने पे खिला रहता था मन,
कहूं कितना भी उभर गया हूं मगर,
आपके होने से दिन होता था मगन,
आपके कहे, समझे, दुनिया इक जश्न,
हर पल को जीते हम, आपकी क़सम,
हर प्याले में नशा जीवन उन्माद का,
हर घूंट में भरा है आपका दिया जश्न,
कहे अनुसार, जी रहे ज़िंदगी बेशुमार,
हमसब साथ हैं, ज़मीं पर हो या गगन,
बताऊं आपको सब हो गये अब बड़े,
कोपलें जो फूंटी थी, महक रहीं चंदन,
आपको याद होगा, थे सब छोटे छोटे,
हांथ हुए पीले कुछ के, कुछ हैं हरफ़न,
आपको बता दूं, के आपका आशीर्वाद,
हम सब पे बरस रहा है सब हैं मनमगन,
“मनुशरद”
Copyright © by Manish Kumar Srivastava