ओस किरणों ने आ घेरा,
भू, धरा को मचला फेरा,
नव प्रभात है ये नव बेला,
चिड़ियों ने चहचहा बोला,
है जीवन अनूठा अलबेला,
कोमल कोपलों पे सूर्य बैठा,
क़तरा क़तरा जगमगा ऊठा
अरुणिम प्रभात आरंभ हुआ,
दीपावली का शुभारंभ हुआ…
प्रतिबिम्ब है ये काल का,
स्याह के नव निर्माण का,
रौशन होने के प्रमाण का,
ईश्वरीय तेज प्रताप का,
स्वयं होने के अहसास का,
हर काल के सामाज के,
उत्तम बौद्धिक विकास का,
यही है मन के दीप जलाना,
दीप जला कर रौशन करना,
मन के घर का कोना कोना,
दीप प्रज्वलित हर ओर हुआ,
दीपावली का शुभारंभ हुआ…
“मनुशरद”
Copyright © by Manish Kumar Srivastava