ज़िंदगी की सरजमीं पर...
करवा!!!
करवा!!!

करवा!!!

रिश्तों में सबसे अहम रिश्ता,
सालाना जन्मदिवस मना रहा,
हर औरत बनी है दुल्हन आज,
आदमी दूल्हे सा है सज रहा,

सुन कर के करवा की कथा,
देखो चांद आ कर खिल गया,
फिर जल का पहला निवाला,
चांदनी घोल पी संग पी लिया,

जब तलक सांसो का चले कारवां,
करवा यूंही रहे सदा करम बरसा,
साथ साथ चले सलामती की दुआ,
चित चिंतन मनभावन मन की दशा,

जश्न उल्लास जन जन रहे सदा,
हरमन हर मन प्रफुल्लित हो रहा,
मनुशरद कहते सुंदर ये सब बड़ा,
नवनूतन होती चले ये प्राचीन प्रथा…

“मनुशरद”

Copyright © by Manish Kumar Srivastava

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