ज़िंदगी की सरजमीं पर...
हूँ!!!
हूँ!!!

हूँ!!!

अंजानी हूं,
जानी जा रही हूं ,
निर्भीक हूं,
पहचान बना रही हूं,
खोज हूं,
ढूंढी जा रही हूं,
श्वास हूं,
जीवंत कहला रही हूं,
स्पंन्दन हूं,
कंपन्न बढ़ा रही हूं,
दृश्य हूं,
दृष्टा बनना चाह रही हूं,
अहं हूं,
ब्रह्म समझ पा रही हूं,
मँथन हूं,
विचार बोती जा रही हूं,
अरदास हूं,
सुनी जा रही हूं,
गुत्थी हूं,
सुलझती जा रही हूं,
आकार हूं,
साकार होती जा रही हूं,
तीव्रता हूं,
ठहराव ला रही हूं,
धूमकेतु हूं,
धरती पा रही हूं,
भाव हूं,
व्यक्त हुए जा रही हूं,
प्रकाश हूं,
तम पीती जा रही हूं,
प्रश्न हूं,
मुद्दे उठा रही हूं,
अंदाज़ हूं,
बयाँ होती जा रही हूं,
अपवाद हूं,
पहचान बना रही हूं,
हवा हूं
बवंडर अपना रही हूं,
आग हूं,
जलन समझना चाह रही हूं,
संघर्ष हूं,
जूझती जा रही हूं,
ऋचायें हूं,
रचती जा रही हूं,

तुममे हूं,
तुमको बता चुकी हूं,
तुमको पाया है,
तुमको पाती जा रही हूं,
तुम्हारे साथ हूं,
तुम्हें जिता रही हूं,
साथ जीतती जा रही हूं,
तुम्हारा साथ…
तुमसे ज़्यादे चाह रही हूं,
तुम्हारे साथ,
हांथ बंटा रही हूं…

“मनुशरद”

Copyright © by Manish Kumar Srivastava

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