ज़िंदगी की सरजमीं पर...
नंदिनी: बारिश में!!! भाग २६
नंदिनी: बारिश में!!! भाग २६

नंदिनी: बारिश में!!! भाग २६

नंदिनी व प्रणय ने इस भरी बारिश में,
इकदूजे को संभाला और घर को गये,
दोनों ही थे घायल दोनों ही भीगे हुए,
बूढ़ी अम्मा ने गर्म पानी किया जल्दी से,
इकदूजे की मरहम पट्टी कर दोनों ने,
सांस लेने बैठ गये वो दादी के कमरे में,
प्रणय की कुहनी छिली नंदिनी के घुटने,
थोड़ा आराम करने को वो दोनों चाहते,
काढ़ा बना दिया पीने को बूढ़ी अम्मा ने,
दोनों ने पिया, दर्द में आराम मिला उससे,
अभी वो कह ही रहे थे कुछ इकदूजे से,
चोट लगी थी कम पर गिरे थे ज़ोर से,
नंदिनी बोली आराम कर लेते हैं काढ़ा पी के,

बारिश रुकी दादी वापस आ गयी पड़ोस से,
व्यवहार से कुछ ऐसे दिखलाया उन्होंने,
कि क्या चल रहा है मालूम ही नहीं उन्हें,
दादी ने घर वापस आ कर अपने कमरे से,
आवाज़ दे बुलाया नंदिनी को पास अपने,
तबतक नंदिनी जा चुकी थी अपने कमरे,
मुश्क़िलों सी पहुंच पाई वो सीढ़ियां चढ़ते,
सोचा थोड़ा आराम करेगी मुंह हाथ धो के,
प्रणय आराम कर रहा नीचे वाले कमरे में,

नंदिनी ने कहलवा भेजा बूढ़ी अम्मा से,
आराम कर रही है आयेगी थोड़ी देर से,
दादी ये सुन आराम से बैठ गयी कमरे में,
नंदिनी सोच रही थी लेटे हुए बिस्तर पे,
क्या कहेगी अब वो प्रणय से मिल के,
कि क्या उसे मुहब्बत है प्रणय से?
और अगर कहेगी तो कहेगी कैसे उससे?
प्रणय जानता ही था के मुहब्बत है उसे,
वो सोच बैठा कि इज़हार करेगा नंदिनी से,
दोनों ही उलझन में दोनों ही क़शमक़श में,
जाने कौन कहे और क्या कहे और किससे,
ऐसी उधेड़बुन में थे दोनों कि क्या ही कहें,

ऊपर से नंदिनी, प्रणय नीचे वाले कमरे से,
लड़खड़ाते जा पहुंचे मिलने वो दादी से,
दर्द था उनके पैर में और हो रहा था दिल में,
दादी ने इंतेख़ाब किया जोश ओ ख़रोश से,
पास बैठा लिया नंदिनी को अपने तख़्त पे,
कहा प्रणय को दूसरी तरफ़ बैठने के लिये,
दोनों ही इकदम ख़ामोश दादी को तक रहे,
ऐसा लगे के दादी अभी कुछ कहने को हैं,
इक हाथ से नंदिनी को पकड़ रखा दादी ने,
दूजे हाथ में हाथ लिया प्रणय का उन्होंने,
जो बोलीं समझ ना आया बुदबुदाते हुए,
दोनों थोड़ा झुक गये थे उनकी बातें सुनने,
आहिस्ते कहा दादी ने, मगर स्पष्टता से,
फिर दोनों हाथ जोड़ लिए उन्होंने अपने,
दोनों की कनखी उंगली मिली इकदूजे से,
ये देख, मुस्कुराते हुए कहा दोनों से दादी ने,
जुग जुग जियो, तुम्हारी जोड़ी सलामत रहे…

इति…

“मनुशरद”
Copyright © by Manish Kumar Srivastava

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