बेल पे चढ़ती छाँव!!!
किसी टहनी से बेल पे चढ़ती छांव,फिर चांदनी ने उजाला बिछाया होगा, किसी ने ग़ैरत को ललकारा जब,किसी ने समाज को जगाया होगा, फिर किसी …
किसी टहनी से बेल पे चढ़ती छांव,फिर चांदनी ने उजाला बिछाया होगा, किसी ने ग़ैरत को ललकारा जब,किसी ने समाज को जगाया होगा, फिर किसी …
जो तरक़श में हों तीर,तो समझे हर कोई पीर, पीर ना सताये कभी,जो रखिये थोड़ा धीर, मिल जाये कोई पीर,समझा दे, क्या है नीर, जो …
हृदय की रिक्तता का क्या कहिये,आपके होने पे खिला रहता था मन, कहूं कितना भी उभर गया हूं मगर,आपके होने से दिन होता था मगन, …
कभी कभी जब दिल आये भर,क्या ही जाने काहे और क्योंकर, जाने क्या सोचता रहा रात भर,है कोई बात के रोता रहा रात भर, उस …
पानी के पास ये इख़्तियार नहीं,वो रोक सके ख़ुद को ढुलकने से, और आब ख़ुदमुख़्तार भी नहीं,कि बे मौसम ख़ुद ही बरस सके, है ख़ुद …
यहां इमारतें हैं बोलती,यहां शरारतें हैं डोलती,यहां सूरतें हैं चहकती,यहां मुहब्बतें हैं महकती, हां, ये शान है लखनऊ की, फ़लसफ़िये हैं हर गलीजिन्हें ज़िंदगी खड़ी …
वो जो हममें तुममें ख़ास था,वो क्या बस कोई रिवाज़ था, ना कोई रिश्ता ना ताल्लुक़ात,क्या जानिए वो क्यों नाराज़ था, चाहा था बस अहसास …
इक रहिन घोंघा, भई इक रहिन घोंघा,वही जिनहिं की पीठ पै शंख रहा उभरा, बात चली के का कारज्यक्रम आज का,बोलै हलुवा पूड़ी संग बस …
शाइस्ता ही सही आहिस्ता ही सही,करती रहना हैराँ, हर रोज़ ए ज़िंदगी, कभी रूठना, मान जाना भी कभी,चाह के हमें मनाती रहना ए ज़िंदगी, यूँही …
बावले से दिन, बावली सी रात हैहम साथ साथ, गज़ब की बात है , उम्र बराबर, साल गुज़ारे हैं हमने,फिर भी लगे यूं, कल की …