ज़िंदगी की सरजमीं पर...
इज़हार!!!

तरबियत(परवरिश)!!!

तरबियत थी ही ऐसी के अब क्या कहूं,मैं अपनी ज़िंदगी को ख़ुद ही आसां हुआ, अक़्सर ही हलक़ में फँस जाती है सांसें,जज़्बाती सैलाब हावी …

बेल पे चढ़ती छाँव!!!

किसी टहनी से बेल पे चढ़ती छांव,फिर चांदनी ने उजाला बिछाया होगा, किसी ने ग़ैरत को ललकारा जब,किसी ने समाज को जगाया होगा, फिर किसी …

तरक़श!!!

जो तरक़श में हों तीर,तो समझे हर कोई पीर, पीर ना सताये कभी,जो रखिये थोड़ा धीर, मिल जाये कोई पीर,समझा दे, क्या है नीर, जो …

लखनऊ : शान अवध की!!!

यहां  इमारतें हैं बोलती,यहां  शरारतें हैं डोलती,यहां  सूरतें हैं चहकती,यहां मुहब्बतें हैं महकती, हां, ये शान है लखनऊ की, फ़लसफ़िये हैं हर गलीजिन्हें ज़िंदगी खड़ी …

रिवाज़!!!

वो जो हममें तुममें ख़ास था,वो क्या बस कोई रिवाज़ था, ना कोई रिश्ता ना ताल्लुक़ात,क्या जानिए वो क्यों नाराज़ था, चाहा था बस अहसास …