ज़िंदगी की सरजमीं पर...
उजले मन!!!

हूँ!!!

अंजानी हूं,जानी जा रही हूं ,निर्भीक हूं,पहचान बना रही हूं,खोज हूं,ढूंढी जा रही हूं,श्वास हूं,जीवंत कहला रही हूं,स्पंन्दन हूं,कंपन्न बढ़ा रही हूं,दृश्य हूं,दृष्टा बनना चाह …

अम्मा : प्रगतिशील विचारधारा!!!

ना समझते तो क्या करते,बस शायद हां में हां करते,छोटे अगर जो होते सपने,सपने भी ना होते अपने,खुलापन उनसे पाया हमने,वरना खो जाते हम कबके, …

बूढ़े!!!

कहा मेरे बच्चे ने,तुम अब बूढ़े हो चले,कुछ दो दशक पहले,अपने पिता के लिये,यही कहा था मैंने, सोचता हूं अब मैं,क्या सोचते होंगे वो,कैफ़ियत क्या …

होली के रँग!!!

आज रंग तन मन,रंग भरो अंतर्मन,मन से मन संगम,हृदय बने विहंगम, आज कर अर्पण,अहंकार भरा मन,होली हो राधे संग,हर दृश्य मनोरम, मुरलीधर वृंदावन,बसे हर राधा …