कल दोपहर बाद!!!
कल दोपहर बाद,शाम ने,महफ़िल थी सजायी,दिन अच्छा ख़ासा दूर था,सुबह ज़रा क़रीब थी और,रात इठलाते हुए थी आई… कल शाम जब,महफ़िल में,रात होने को शामिल …
कल दोपहर बाद,शाम ने,महफ़िल थी सजायी,दिन अच्छा ख़ासा दूर था,सुबह ज़रा क़रीब थी और,रात इठलाते हुए थी आई… कल शाम जब,महफ़िल में,रात होने को शामिल …
ठंड पड़ रही है,बर्फ़ गिर रही है,सर्द हो के सांसे,धुआं बन रही हैं, हाथों की जुंबिश,नम पड़ रही है,थरथराते होंठों पर,कंपकंपी चढ़ रही है, पानी …