नंदिनी : उलझन सुलझे ना!!! भाग १६
“ख़त खुला मजमून पढ़ा ज़िंदगी गुलज़ार,नंदिनी की नींद उड़ी, क्या ये था चमत्कार,” नंदिनी ने क़रीने से खोला ख़त कुछ ऐसे,जैसे प्रणय निकल आएगा उसमें …
“ख़त खुला मजमून पढ़ा ज़िंदगी गुलज़ार,नंदिनी की नींद उड़ी, क्या ये था चमत्कार,” नंदिनी ने क़रीने से खोला ख़त कुछ ऐसे,जैसे प्रणय निकल आएगा उसमें …
क्या बात छिड़ी झंकृत हुए तार दिल के,प्रणय नंदिनी से कह रहा याद ये कर के,उस दिन जब हम नैनीताल में थे मिले,क्या पता था …
क्या हुआ उस रात को उसे ना पता चला,वो सरल हृदय ढूंढने में नंदिनी को लगा रहा,ये उसका भृम था या सच या था सपना,यही …
मिल के यहां प्रणय से उसका है क्या हाल,मुक्तेश्वर में रहता उन्मुक्त घूमता बुग्याल,कुमाऊं का कोई स्थान उसने नहीं छोड़ा था,हिम भूखंडों में खेलना अच्छा …
नंदिनी सोच रही थी अब वापस जाने की,मन में फ़ितरत थी वहीं समय बिताने की,अजीब ओ ग़रीब असमंजस की घड़ी थी,क्या करे क्या ना करे …
बेरीनाग से आया तार, दादी बीमार,याद तिहारी आ आ के बेचैन बेहाल,दादी का घर पाषाण युग सा सुंदर,वहां घूमते लाल मुंह वाले ढेरों बंदर,दादा दादी …
अमलतास गुलमोहर खिल रहा दिल्ली में,रौशन धूप में खिल रहे थे फूल रंग बिरंगे,ख़ुशनुमा माहौल था उसपर दिन सुनहरे,महरौली में दिखे कींकड जंगल अनोखे,बहुत बड़े …
भाग्य का लिखा कभी टल नहीं सकता,अच्छा है या बुरा ये बस समय को पता,हां जाने अन्जाने ही ये फल है कर्मों का,ग़र शिद्दत से …
कई दिनों बाद वो थी पहली मुलाक़ात,जितने शांत दिख रहे, थे उतने ही अशांत,कुछ ऐसा बीच दोनों के, जो परे जज़्बात,फिर भी कही ना जा …