ज़िंदगी की सरजमीं पर...
मासूमियत!!!

नंदिनी : मीठी अनुभूति!!! भाग ६

नंदिनी स्वाभिमानी लगती अभिमानी,उसकी इस ख़ूबी से प्रभावित थे सभी,बस ज़िंदगी में थी तो प्यार की कमी,अपनी इस भावना को नकारती रही,या उसे डर था …

नंदिनी : कुर्ग का ज़िक्र!!! भाग ५

दक्खन के चबूतरे कूर्ग में परिवार था बसा,उत्तर के काशीपुर शहर का था रहनेवाला,मां पिता इक बेटी इक बेटे का संसार उनका,जंगल संरक्षण विभाग में …

नंदिनी : मुख़्तलिफ़ अंदाज़!!! भाग ४

प्रणय को लगता था कि ज़िंदगी,हर वक़्त गुलज़ार होने को हुई,पढ़ाई में उसका मन लगता था कम,कभी कभी वो घूमने निकलता इकदम,साथ दोस्तों के ख़ुद …

नंदिनी : सफ़र का आग़ाज़!!! भाग ३

प्रणय की शिक्षा शुरू हुई बनबसा से,आगे की पढ़ाई की उसने नैनीताल से,बारहवीं की थी बिड़ला विद्या मंदिर से,कला की पढ़ाई कुमाऊं विश्वविद्यालय से,उसको पहाड़ …

नंदिनी : और परिचय!!! भाग २

समग्र चरित्र निवासिनी,तन मन से सुंदर नंदिनी,स्वयं में वो परिपूर्ण थी,इच्छायें उसकी बढ़ रही,जवानी उसपर चढ़ रही,ज़िंदगी से भरपूर वो थी,मां पिता के बीच संबंधों …

नंदिनी : परिचय!!! भाग १

बेरीनाग की सुंदर अनारकली,अल्मोड़ा में थी वो पली बढ़ी,बचपन से थी अत्यंत चुलबुली,पैर ना टिकते थे एक भी घड़ी,उछल कूद मौज मस्ती थी बड़ी,उसको प्यारा …

नंदिनी : भूमिका!!!

पहाड़ों के प्रति मेरा लगाव वहां जल्द पहुंचने की व्याकुलता,और मेरे अनगिनत तजुर्बों में बसा कुमाऊं, गढ़वाल… शायद यहीं से नींव पड़ी “नंदिनी” के बारे …

दरख़्त के पास वाली दुकान!!! भाग ७

हां, बनारस शहर की ख़ास बात है ये,यहां की बोली में गज़ब की मिठास है,जब कभी लगे के दिल बड़ा उदास है,तो उल्टी बहती हुई …

वक़्त और हम!!!

अलग ही अंदाज़-ए-बयाँ है… क्या ये वक़्त चल रहा है,के वक़्त मुसलसल थमा है,वक़्त के हाथ में आईना है,देखता है कि अक़्स अपना है,सोचता हूं, …