ज़िंदगी की सरजमीं पर...
मासूमियत!!!

मग्फ़िरत(माफ़ी)!!!

उन्हें मग़्फ़िरत की हैं चाहतें,अदाक़ारी हमसे फ़रमाते हैं, लफ़्ज़ों को ग़र छोटे में ना देखें,क्या ख़ूबसूरत बला चाहते हैं, वो जान गए हम साथ हैं …

मासूम प्रार्थना!!!

इक बच्ची को प्रार्थना देख करते,और हर रोज़ वही करते करते,उत्सुकता जागी पुजारी मन में,जानना चाहा कि क्या प्रार्थना है, इक दिन जा सुना उसने …