मग्फ़िरत(माफ़ी)!!!
उन्हें मग़्फ़िरत की हैं चाहतें,अदाक़ारी हमसे फ़रमाते हैं, लफ़्ज़ों को ग़र छोटे में ना देखें,क्या ख़ूबसूरत बला चाहते हैं, वो जान गए हम साथ हैं …
उन्हें मग़्फ़िरत की हैं चाहतें,अदाक़ारी हमसे फ़रमाते हैं, लफ़्ज़ों को ग़र छोटे में ना देखें,क्या ख़ूबसूरत बला चाहते हैं, वो जान गए हम साथ हैं …
कुछ ख़याल छुटपन के,ज़हन में तैरते हैं ऐसे,के वो ख़याल नहीं हैं,गुज़रते पल हैं देखे,सच में बैठे हों पास जैसे, मिट्टी गूंध कर हाथों से,सौंधी …
इक बच्ची को प्रार्थना देख करते,और हर रोज़ वही करते करते,उत्सुकता जागी पुजारी मन में,जानना चाहा कि क्या प्रार्थना है, इक दिन जा सुना उसने …