ज़िंदगी की सरजमीं पर...
मुबारक़

ओस!!!

ओस ठहरी टहनी पर,टहनी लोच से भर गयी,ज़रा सी हलचल हुई,ओस ज़मीं पे टिक गयी, ज़मीं भी लगी कहने,ठंड में क्यों कुड़क रही,ओस ने फिर …

राम!!!

राह चलते चलते हमें राम मिल गये,भाग्य में लिखा था, पहचान ना सके,हमको तो हर दिन ही राम मिलते रहे,आशंकित चित्त ने स्वीकार नहीं किये, …

पद्म पंकज!!!

आज इक सफ़र कीबात करता हूं,तुमसे जो पायाउसे बयां करता हूं,पायी है ज़ुबां,ज़ुबां खोलने की अदा,तलफ़्फ़ुस में इज़ाफ़ा,अदब का लिफ़ाफ़ा,और जाने क्या क्या, और ये …