दरख़्त के पास वाली दुकान!!! भाग ३
इन्ही ख़यालों के बीच पहुंची घर अपने,और सारी रात निकली बुनते हुए सपने,हक़ीक़त से परे थे वो सपने जिन्हें मैंने,अन्जाने चुन लिया था अपनी ज़िंदगी …
इन्ही ख़यालों के बीच पहुंची घर अपने,और सारी रात निकली बुनते हुए सपने,हक़ीक़त से परे थे वो सपने जिन्हें मैंने,अन्जाने चुन लिया था अपनी ज़िंदगी …
जबसे उसको अपना माना मैंने,इंतेज़ार बड़ी सज़ा है, ये जाना मैंने,इंतेहा तो तब हुई, नाम ना जाना मैंने,कैसा अनुभव, जिसे जीना जाना मैंने,और ये भी …
दरख़्त के पास वाली दुकान से,कुछ ख़रीद रहा था जब पहुंची मैं,देखा भी ना था मैंने उसे ग़ौर से,और क्यों ही देखूं किसी को मैं?जब …
किसी ने कहा : “मिट्टी में मिलने से पहले मिट्टी से मिल तो लें” और यूं शुरू हुआ ज़िंदगी का वो सफ़र जिसने घोंघे को …
जो ग़ुबार बन रहे थे कहीं,जो गर्द बन उड़ रहे थे कहींजो नहीं संभल रहे थे कहीं,दश्त में ख़्वाब बोये थे कभी, इनायत उनकी कुछ …
हर मोड़ पे इंतेज़ार करता हूं,तुझे बेशुमार प्यार मैं करता हूं,ना देख यूं तीखी नज़रों से,मैं घायल हो जाया करता हूं, तीर ए नीमक़श क्या …
कभी चांद तारों की बात होती है,कभी इन नज़ारों की बात होती है, यूं दिल करता है के कह दूं तुझसे,तुझे तुझसे चुराने की बात …
मेरी आहों का ना तज़क़िरा कीजिये,मिलता है सुकूँ आप मुस्कुरा दीजिये, रास आने लगी है हमें, शब ए ग़म,मेरे दर्द की ना कोई दवा कीजिये, …
रेत, जो लहरों में बह के बाहर आ गयी,ना ज़मीं की हुई ना समंदर में समा सकी, किनारे रेत-क़तरे पैरों तले फिसलते रहे,नाज़ुक सी ज़मीं …
इक शाम शरद की,ठंड भी थी पड़ रही,इक शाख़ दरख़्त की,खिड़की से झांक रही,लचीली लोच से भरी,इशारों में कह रही,मुहब्बत हूँ मैं,ज़रा खोल खिड़की… जो …