शोर का सन्नाटा!!!
है ये शोर का सन्नाटा,यहां हर कोई भन्नाता,है ढपली है राग अपना,औ दूसरों पे चिल्लाता, है ये शोर का सन्नाटा… दरवाज़े पे कान लगाता,आवाज़ें सुन …
है ये शोर का सन्नाटा,यहां हर कोई भन्नाता,है ढपली है राग अपना,औ दूसरों पे चिल्लाता, है ये शोर का सन्नाटा… दरवाज़े पे कान लगाता,आवाज़ें सुन …
सुबह सवेरे ख़ूब कहा,मैं इधर तू उधर से आ,दो दिन के सफ़र का,दूर कहीं मिलेगा रस्ता,बांध ले अपना बस्ता,उदय हो जब सूर्य का,नीर झर झर …
दिवाली आयी है,हमने सजाई है,अपने द्वारे पे,चौखट चौबारे पे,घर के अंदर में,मन के मंदिर में,जी के समंदर में,घर को संवारेंगे,चौक बनायेंगे,लड़ियां लगायेंगे,अंतर् मन जगायेंगे,मन बसे …
ख़ुश हैं हम, अपने वतन में हैं हम,आज़ाद हैं हम, आबाद हैं हम,बस थोड़ा बहुत परेशान हैं हम,कुछ आदतें हैं जो बदलनी हैं,कुछ रवायतें हैं …
जश्न ए चरागां है आज हर दरवाज़े,अनुज संग सीता राम घर हैं पहुंचे, बीते चौदह साल जाने कैसे थे गुज़रे,पर हर पल ज़िंदगी के नायाब …