अब आगे!!!
बचपन में आ गये, धूप सेंकने का मज़ा, किसी बात की नहीं फ़िक्र, ना कोई ज्ञान ठेलती बातें ना ही कल का कोई ज़िक्र…ये हम …
बचपन में आ गये, धूप सेंकने का मज़ा, किसी बात की नहीं फ़िक्र, ना कोई ज्ञान ठेलती बातें ना ही कल का कोई ज़िक्र…ये हम …
दूर से आती आवाज़ के जब पास आ गये,बारिश के नदी में उतरने से सैलाब आ गये, ख़ामोश थे लब औ थरथराहट थी सांसों में,हलचल …