अवगम(Perception) : घोंघा!!!
हर पारम्परिक बड़े से परिवार में इक ना इक बच्चा घोंघा होता है।घोंघा समझे आप? नहीं ना, रुकिये हम समझाते हैं। अरे वही जो बरसातों …
हर पारम्परिक बड़े से परिवार में इक ना इक बच्चा घोंघा होता है।घोंघा समझे आप? नहीं ना, रुकिये हम समझाते हैं। अरे वही जो बरसातों …
तेरे जैसा नहीं कोई, रखना यक़ीं चाहिये,जो तू कहना चाहे खुल के कहना चाहिये, वजूद तेरा इसलिए नहीं के रहे बंध के,ग़र हो मंज़ूर, बंधन …
हूँ कलाकार, किरदार सोच रहा हूँ,मुख़्तलिफ़ रँग बार बार भर रहा हूँ, अख़लाक़ रच के मन से गढ़ रहा हूँ,ख़ुद को क़िताब की तरह पढ़ …
टूटे अहसासों से पीछा छूटता नहीं,बरगद तले भी पनपा है कुछ कहीं, दरख़्त पे यूं, तिलिस्म लटके है कई,ज्यूं इक बदन ढो रहा, लिबास कई, …
निकल चुकी बात अब हाथ से इंसानों के,ज़हरीली सांस पी रहे हैं अपने मकानों में, आंख मिचिया देता है धुआं सर्द रातों में,ज़हर नशीला फैला …
नदिया किनारे इक गांव,है प्यासा और नहीं छांव, मिट्टी पर, निशां नहीं पांव,नदी सूखी कैसे चले नाव, प्यास है आस, नहीं बरसात,आशा है, विश्वास से …
दिन गिनते गिनते रात भई,रात भी ना कोई बात हुई,रात गुज़री फिर रात हुई,ना जाने कब वो रात हुई, वक़्त गुज़रा रात ना गई,सारा दिन …
आज रूस ने कर दिया हमला,आज कियेव पे भारी बम गिरा, आज जंग का दौर शुरू हुआ,मंद दुनिया का बाज़ार हुआ, आज बख्श दो यूक्रेन …