धौकनी!!!
धड़कनें बेचैन और मैं हूं ख़ामोश खड़ा,बेवजह की उलझनों को हूं सुलझा रहा, हैं क्या कुछ ऐसा के जिससे हूं डरा डरा,भूचाल है मेरे अंदर, …
धड़कनें बेचैन और मैं हूं ख़ामोश खड़ा,बेवजह की उलझनों को हूं सुलझा रहा, हैं क्या कुछ ऐसा के जिससे हूं डरा डरा,भूचाल है मेरे अंदर, …
ज़िंदगी गुज़र रही अब ग़म में तेरे,घाव भी हुए थे क़ाफ़ी गहरे गहरे, जब साथ थे तो ग़म थे साथ के,अलग हुए तो जाना, बिन …
हवाएं आजकल सर्द चल रहीं हैं,पेड़ों की शाखों पे ओस थम रही है, इक शाख़ ने हाथ फैलाया ज़रा सा,बरफ़ उसपे चादर सी जम रही …