ज़िंदगी की सरजमीं पर...
समय!!!

वक़्त!!!

वक़्त, आदमी की इजाद है,बाक़ी सब इससे आज़ाद हैं, दिमाग़ी क़ैद में, वक़्त सोचता,बग़ावत तो करनी ज़ोरदार है, यूं इंक़लाब कर रहा है, वक़्तजैसे वक़्त …

परिंदों के आसमां में!!!

परिंदों के आसमां में,उड़ता इक परिंदा,इक इक जोड़ता,तिनका तिनका,ऊंचे दरख़्त पर,बना रहा आशियां,जहां से है दिखता,आसमां, कहकशां,और ढेरों तारों का,झुरमुट बन जाना,हौले हौले टिमटिमाना… ऊंचे …

नया साल मुबारक़!!!

बर्फ़ के फ़ोहे,पलकों पे ठहरे,कितने सुंदर हैं,दृश्य ये सुनहरे, इस रचना मेंखोये ना कैसे,तारीख़ बदली,नया कुछ करने, नये हैं नज़रिये,नये हैं फ़लसफ़े,पुराने बने नये,नई शुरुआत …

ग्यारह!!

महीने निकले ग्यारह हैं,ये साल बीतने वाला है, इक और इक ग्यारह है,अब वक़्त बदलने वाला है, बीतते तो बस पल ही हैं,दिन साल आज …