वजूद!!!
कल शाम, कल रात से बात हुई,सोचती रही रात मगर नहीं सोयी,वक़्त था तक़रीबन रात के ढाई,अल्लाह दुहाई अल्लाह दुहाई,नींद आ कर भी नहीं आई,सख़्त …
कल शाम, कल रात से बात हुई,सोचती रही रात मगर नहीं सोयी,वक़्त था तक़रीबन रात के ढाई,अल्लाह दुहाई अल्लाह दुहाई,नींद आ कर भी नहीं आई,सख़्त …
वो सिमट जाना चाहती थी, उस वक़्त के क़रीब जाना चाहती थी, जहां उसने देखा था खुला आसमां और बैठी थी वो इक दरख़्त तले …
दानिशमंदों की बैठक में एक से एक ख़याल आये,नाराज़ दिखे ज़्यादातर हां ख़ुश भी दो चार आये, मौजूदा वक़्त में तकनीक के मुख़्तलिफ़ रूप दिखे,ज़िंदगी …
ज़िंदगी मद्धम मद्धम सी,गुनगुनाती चली जा रही,सुनते थे हम ख़ामोश बैठे,अकेले में आकाशवाणी,बिना दिए अपनी वाणी, गीतमाला बिनाका की,कार्यक्रम विविध भारती,ग्यारह बजे की सुई,चुप सारी …
जिस दम आज़ाद ख़याल बयां हुआ,मैं परेशानी का सबब, मेरी जाँ हुआ, अच्छा था जब, ढका छुपा था सब,राज़ नाज़िर हुआ, मैं बदनाम हुआ, ख़ता …
धुआँ धुआँ सा है ख़यालों के दरमियाँ,साफ़ साफ़ देखने का तरीक़ा है क्या? ग़र्द उड़ उड़ के जम रही है ख़यालों पे,हटाने का उसको, मिलता …
और ना डालिए ज़ोर,डोर है बेहद कमज़ोर,बात मनवाने की होड़,मैं हूं मैं का नहीं तोड़,दो दो पांच का जोड़,कोई भी आये मोड़,चाहे जायें दुनिया छोड़,नहीं …
बीच अपनों के ही, तन्हां मैं रह गया,टुकड़ा बादल सा, छिटका मैं रह गया, ज़िंदगी खड़ी सामने हंसता मैं रह गया,चाहने वाले कहते, मुझे रोता …
बादलों पे पैर रख,बादलों के ऊपर,बनायेंगे नये क़िस्से,जो बादलों के परे,उड़ा के ले चलें हमें,वहां से वो सब देखने,गुज़रे वक़्त को समेटने,आते वक़्त की धूप …
ज़िंदगी भी क़ाश तस्वीर की तरह होती,तीन घंटे में हर ग़म, ख़ुशी में तब्दील होती, सारी दुनियादारी पलों में गुज़रती होती,ग़म और ख़ुशी कम कम …