दरख़्त के पास वाली दुकान!!! भाग १०
अगले दिन रोका उन्होंने देख कर मुझे,वो बोले कि मतलब क्या है अलग से?हमने कहा विषय कमज़ोर है मेरे लिये,कहा उन्होंने ठीक है सोच कर …
अगले दिन रोका उन्होंने देख कर मुझे,वो बोले कि मतलब क्या है अलग से?हमने कहा विषय कमज़ोर है मेरे लिये,कहा उन्होंने ठीक है सोच कर …
Copyright © by Manish Kumar Srivastava बार बार हरबार,वो कहते जाते हैं,हम सुनते जाते हैं,फिर हम कहते हैं,वो सुनते जाते हैं, चर्चाओं की हमारी लंबी …
Copyright © by Manish Kumar Srivastava कबूतर जो सधे नहीं,रहे वो अब गधे नहीं,कहते फिरते हैं सबसेकम दामों में गुज़ारा नहीं, जिन्हें फ़ाख़्ते उड़ाने में,आता …
Copyright © by Manish Kumar Srivastava सफ़र में उनका साथ, हाथों में हाथ,रंज भी ना हो किसी को, तो कैसे मज़ा लीजिये, किस बहर में …
Copyright © by Manish Kumar Srivastava जब नाम लिखवाया गया,हमारा विद्यालय में,हम दो रहें हैं साथ सदा ही,अपने आलय में, पहला दिन हमारा रोते गुज़रा,कक्षा …
Copyright © by Manish Kumar Srivastava एक घर बिना दीवार का,बड़ी बड़ी खिड़कियाँ,हैं खुली रहती, चौड़े से दरवाज़ों पे बड़ी सी,है चिटखनी चढ़ी,चैन की घड़ी …
Copyright © by Manish Kumar Srivastava मकाँ नहीं, अपना घर ढूँढता हूँ,इन ईंटों में जज़्बातों को ढूँढता हूँ, ख़ासा सजा के रख्खा है हमने आशियाँ,और …
Copyright © by Manish Kumar Srivastava बरोठाघर का हो,मन का होया भरोसे का,गुज़रना ही पड़ता है, किवाड़घर का,या अंतर्मन का,राम का रहीम का,खोलना ही पड़ता …