नंदिनी : मीठी अनुभूति!!! भाग ६
नंदिनी स्वाभिमानी लगती अभिमानी,उसकी इस ख़ूबी से प्रभावित थे सभी,बस ज़िंदगी में थी तो प्यार की कमी,अपनी इस भावना को नकारती रही,या उसे डर था …
नंदिनी स्वाभिमानी लगती अभिमानी,उसकी इस ख़ूबी से प्रभावित थे सभी,बस ज़िंदगी में थी तो प्यार की कमी,अपनी इस भावना को नकारती रही,या उसे डर था …
दक्खन के चबूतरे कूर्ग में परिवार था बसा,उत्तर के काशीपुर शहर का था रहनेवाला,मां पिता इक बेटी इक बेटे का संसार उनका,जंगल संरक्षण विभाग में …
प्रणय को लगता था कि ज़िंदगी,हर वक़्त गुलज़ार होने को हुई,पढ़ाई में उसका मन लगता था कम,कभी कभी वो घूमने निकलता इकदम,साथ दोस्तों के ख़ुद …
प्रणय की शिक्षा शुरू हुई बनबसा से,आगे की पढ़ाई की उसने नैनीताल से,बारहवीं की थी बिड़ला विद्या मंदिर से,कला की पढ़ाई कुमाऊं विश्वविद्यालय से,उसको पहाड़ …
समग्र चरित्र निवासिनी,तन मन से सुंदर नंदिनी,स्वयं में वो परिपूर्ण थी,इच्छायें उसकी बढ़ रही,जवानी उसपर चढ़ रही,ज़िंदगी से भरपूर वो थी,मां पिता के बीच संबंधों …
बेरीनाग की सुंदर अनारकली,अल्मोड़ा में थी वो पली बढ़ी,बचपन से थी अत्यंत चुलबुली,पैर ना टिकते थे एक भी घड़ी,उछल कूद मौज मस्ती थी बड़ी,उसको प्यारा …
नंदिनी की रचना में सबसे बड़ा आभार कुमाऊं गढ़वाल का है, जिस भूमि के प्रति मेरा अलग ही अनुराग है… मेरे जीवनसाथी के योगदान का …
पहाड़ों के प्रति मेरा लगाव वहां जल्द पहुंचने की व्याकुलता,और मेरे अनगिनत तजुर्बों में बसा कुमाऊं, गढ़वाल… शायद यहीं से नींव पड़ी “नंदिनी” के बारे …
ठंड पड़ रही है,बर्फ़ गिर रही है,सर्द हो के सांसे,धुआं बन रही हैं, हाथों की जुंबिश,नम पड़ रही है,थरथराते होंठों पर,कंपकंपी चढ़ रही है, पानी …