ज़िंदगी की सरजमीं पर...
उड़ान!

परिंदों के आसमां में!!!

परिंदों के आसमां में,उड़ता इक परिंदा,इक इक जोड़ता,तिनका तिनका,ऊंचे दरख़्त पर,बना रहा आशियां,जहां से है दिखता,आसमां, कहकशां,और ढेरों तारों का,झुरमुट बन जाना,हौले हौले टिमटिमाना… ऊंचे …

भारत गणतंत्र!!!

जल वायु अग्नि आकाश धरा,कण कण ऊर्जा संचार हो रहा,असीमित व्यापक विचारधारा,ये धरा है धरोहर की रंगशाला,अनूठा है बाल अनूठी है बाला,हज़ारों साल से गणतंत्र …

बस इक ही लता!!!

बसंत बहार फागुन की धार,मालकौंस मियां की मल्हार,भैरव भैरवी यमन कल्याण,राग दरबारी बसंत व केदार,तिलक कामोद मेघ मल्हार,पूर्या धनाश्री थाट बिलावल,वृंदावनी सारंग राग बिहाग,अनगिनत राग …