हेमंत का आग़ाज़!!!
हल्क़ी भीनी मधम सी ठंड होने लगी,जिस्म औ रूह की मीठी जंग होने लगी, हेमंत की हवा मंद मंद सर्द होने लगी,रुख़ों की लाली ज़रा …
हल्क़ी भीनी मधम सी ठंड होने लगी,जिस्म औ रूह की मीठी जंग होने लगी, हेमंत की हवा मंद मंद सर्द होने लगी,रुख़ों की लाली ज़रा …