ज़िंदगी की सरजमीं पर...
मुबारक़!!!

हूँ!!!

अंजानी हूं,जानी जा रही हूं ,निर्भीक हूं,पहचान बना रही हूं,खोज हूं,ढूंढी जा रही हूं,श्वास हूं,जीवंत कहला रही हूं,स्पंन्दन हूं,कंपन्न बढ़ा रही हूं,दृश्य हूं,दृष्टा बनना चाह …

ओस!!!

ओस ठहरी टहनी पर,टहनी लोच से भर गयी,ज़रा सी हलचल हुई,ओस ज़मीं पे टिक गयी, ज़मीं भी लगी कहने,ठंड में क्यों कुड़क रही,ओस ने फिर …

नया साल मुबारक़!!!

बर्फ़ के फ़ोहे,पलकों पे ठहरे,कितने सुंदर हैं,दृश्य ये सुनहरे, इस रचना मेंखोये ना कैसे,तारीख़ बदली,नया कुछ करने, नये हैं नज़रिये,नये हैं फ़लसफ़े,पुराने बने नये,नई शुरुआत …

दूसरा हिस्सा!!!

बादलों पे पैर रख,बादलों के ऊपर,बनायेंगे नये क़िस्से,जो बादलों के परे,उड़ा के ले चलें हमें,वहां से वो सब देखने,गुज़रे वक़्त को समेटने,आते वक़्त की धूप …