क़वा’इद!!!
कुछ क़वा’इदें साथ हैं ज़िंदगी के,कुछ मान्यताएं इंसा ख़ुद है बनाता, वक़्त, उम्र बताने से बाज़ नहीं आता,बेल के जैसे शरीर पर चढ़ता जाता, और …
कुछ क़वा’इदें साथ हैं ज़िंदगी के,कुछ मान्यताएं इंसा ख़ुद है बनाता, वक़्त, उम्र बताने से बाज़ नहीं आता,बेल के जैसे शरीर पर चढ़ता जाता, और …
अंजानी हूं,जानी जा रही हूं ,निर्भीक हूं,पहचान बना रही हूं,खोज हूं,ढूंढी जा रही हूं,श्वास हूं,जीवंत कहला रही हूं,स्पंन्दन हूं,कंपन्न बढ़ा रही हूं,दृश्य हूं,दृष्टा बनना चाह …
ओस ठहरी टहनी पर,टहनी लोच से भर गयी,ज़रा सी हलचल हुई,ओस ज़मीं पे टिक गयी, ज़मीं भी लगी कहने,ठंड में क्यों कुड़क रही,ओस ने फिर …
शाइस्ता ही सही आहिस्ता ही सही,करती रहना हैराँ, हर रोज़ ए ज़िंदगी, कभी रूठना, मान जाना भी कभी,चाह के हमें मनाती रहना ए ज़िंदगी, यूँही …
बर्फ़ के फ़ोहे,पलकों पे ठहरे,कितने सुंदर हैं,दृश्य ये सुनहरे, इस रचना मेंखोये ना कैसे,तारीख़ बदली,नया कुछ करने, नये हैं नज़रिये,नये हैं फ़लसफ़े,पुराने बने नये,नई शुरुआत …
बादलों पे पैर रख,बादलों के ऊपर,बनायेंगे नये क़िस्से,जो बादलों के परे,उड़ा के ले चलें हमें,वहां से वो सब देखने,गुज़रे वक़्त को समेटने,आते वक़्त की धूप …