ज़िंदगी की सरजमीं पर...
यूँ भी!!!

बोलती तस्वीर!!!(सिनेमा)

ज़िंदगी भी क़ाश तस्वीर की तरह होती,तीन घंटे में हर ग़म, ख़ुशी में तब्दील होती, सारी दुनियादारी पलों में गुज़रती होती,ग़म और ख़ुशी कम कम …