ज़हरीली सांस!!!
निकल चुकी बात अब हाथ से इंसानों के,ज़हरीली सांस पी रहे हैं अपने मकानों में, आंख मिचिया देता है धुआं सर्द रातों में,ज़हर नशीला फैला …
निकल चुकी बात अब हाथ से इंसानों के,ज़हरीली सांस पी रहे हैं अपने मकानों में, आंख मिचिया देता है धुआं सर्द रातों में,ज़हर नशीला फैला …
ज़िंदगी भी क़ाश तस्वीर की तरह होती,तीन घंटे में हर ग़म, ख़ुशी में तब्दील होती, सारी दुनियादारी पलों में गुज़रती होती,ग़म और ख़ुशी कम कम …