ज़िंदगी की सरजमीं पर...
ए ज़िंदगी!

सवाब!!!

दिलपे था उसके ज़ोर, इक इल्ज़ाम दिया था उसे,उसी ने दिया ज़ख़्म जिसने मलहम दिया था उसे, इल्ज़ाम को थामे थामे, वो बिताता रहा ज़िंदगी,जो …

तरबियत(परवरिश)!!!

तरबियत थी ही ऐसी के अब क्या कहूं,मैं अपनी ज़िंदगी को ख़ुद ही आसां हुआ, अक़्सर ही हलक़ में फँस जाती है सांसें,जज़्बाती सैलाब हावी …

तरक़श!!!

जो तरक़श में हों तीर,तो समझे हर कोई पीर, पीर ना सताये कभी,जो रखिये थोड़ा धीर, मिल जाये कोई पीर,समझा दे, क्या है नीर, जो …

क्या बताऊँ तुझे!!!

क्या बताऊँ तुझे,कैसे बताऊँ तुझे,के हर बार उस पार,लगती वहां नुमाइशें,पूरी होती फरमाइशें, चल ले चलूं तुझे,के हर पल यूं लगे,के जाना है उस पार,आते …