ज़िंदगी की सरजमीं पर...
गुज़रता है!

ग्यारह!!

महीने निकले ग्यारह हैं,ये साल बीतने वाला है, इक और इक ग्यारह है,अब वक़्त बदलने वाला है, बीतते तो बस पल ही हैं,दिन साल आज …