ज़िंदगी की सरजमीं पर...
गुज़ारिश!

दरख़्त के पास वाली दुकान!!! भाग ७

हां, बनारस शहर की ख़ास बात है ये,यहां की बोली में गज़ब की मिठास है,जब कभी लगे के दिल बड़ा उदास है,तो उल्टी बहती हुई …

दरख़्त के पास वाली दुकान!!! भाग ६

मन ही मन बड़े जतन ये गुन रही थी मैंक़ाश मिल जाये, जिसकी बांवली थी मैं,पर हुआ ना ऐसा गवां बैठी थी मौका मैं,अपने ही …

आज़ादी!!!

ख़ुश हैं हम, अपने वतन में हैं हम,आज़ाद हैं हम, आबाद हैं हम,बस थोड़ा बहुत परेशान हैं हम,कुछ आदतें हैं जो बदलनी हैं,कुछ रवायतें हैं …