दसानन की व्यथा!!!
वो तो ईश का युग था, वो तो ईश का सुत था, बोझ दससीस का उठा, वो थक था बहुत गया, इक इक कर शीश …
वो तो ईश का युग था, वो तो ईश का सुत था, बोझ दससीस का उठा, वो थक था बहुत गया, इक इक कर शीश …
तस्वीर राम की सुंदर लग रही है,तासीर राम की असर कर रही है,रावण को तजना ज़िंदगी नहीं है,मन रावण को समझने की,ज़रूरत हमेशा से रही …