ज़िंदगी की सरजमीं पर...
बसंत पंचमी!!!

बसंती बसंत !!!

बसंती बसंत आया,गुलिस्ताँ मुस्कुराया,मस्त सुगंध मिट्टी से,सारा आलम भर आया, अमृत वर्षा चौतरफ़ा,हर पत्ता है लहरा रहा,हर टहनी यूँ झूम रही,लगे बसन्त पगला रहा, आसमाँ …